शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

आ मुन्नी आ / (एक बंगला गीत का हिन्दी तरजुमा)

(बेटी का अपने पिता और पिता का अपनी बेटी के प्रति कोमल भावनाओं से ओतप्रोत एक बंगला गीत ‘‘आय खुकु आय’’ है जिसमें जीवन की बेहद सामान्य घटनाओं के माध्यम से पिता-पुत्री के बीच के प्रेम को बखूबी व्यक्त किया गया है। इन भावों में हेमन्त कुमार और श्रावन्ती मजूमदार की आवाजों ने जान डाल दी है। गीत पुलक बंदोपाध्याय ने लिखा है। शायद आप सभी को इसके शब्द पसंद आएँ। बंगला फिल्म ‘द फादर’ के बेहद खूबसूरत और भावनाओं से लबरेज इस गीत के बोलों का हिन्दी तरजुमा कुछ इस प्रकार है ----)


(बेटी -) कटे ना समय जब किसी भी तरह
दोस्तों के फोन में भी मन लगे ना
खिड़की की जाली से तब माथा टिकाए
सोचती हूँ बाबूजी-सा कोई बोले ना
आ मुन्नी आ आ मुन्नी आ
(पिता -) आजा मेरे पास ये गीत सीख ले
नए नए कुछ सुर सीख लेना
तुम्हें कुछ भी जब अच्छा न लगे
पियानो पर तब तुम इन्हें बजाना
आ मुन्नी आ आ मुन्नी आ
(बेटी -) सिनेमा से आँखें जब लगें जलने
गरम कॉफी में भी मजा न मिले
कविता की किताबों को दूर हटा कर
सोचती हूँ बाबूजी पुकारते मुझे
आ मुन्नी आ आ मुन्नी आ
(पिता -) आ मेरे पास अभी चली आ
घूम आएँ कहीं शहर से हट कर
मुझे मेरे काम से जबरन उठा लो
बचपन की तरह बहाने बनाकर
आ मुन्नी आ आ मुन्नी आ
(पिता -) आ मेरे पास तू आ मेरी मुन्नी
सबसे पहले जरा देखूँ मैं तुझे
देखूँ तो तूने केश बाँधे हैं कैसे
लगाया है काजल कैसे काली आँखों में
आ मुन्नी आ आ मुन्नी आ
(बेटी -) सभी तो मेरी तरह हो जाते हैं बड़े
बचपन के वे दिन करके पार
जानूँ ना कितनों को मिलती मगर
अपने बाबूजी की मीठी पुकार
आ मुन्नी आ आ मुन्नी आ
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Translated in Hindi By Pramod Sharma

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