शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

दूरदर्शन / प्रमोद शर्मा / (लघुकथा)


दूरदर्शन / प्रमोद शर्मा
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रावण की आज्ञा पाकर त्रिजटा ने सीता को पुष्पक विमान पर बिठाया और युद्धभूमि की ओर चल पड़ी जहाँ रावणकुमार इन्द्रजीत के अनुसार राम व लक्ष्मण मृत पड़े थे।

पुष्पक विमान से सीता ने देखा - राम और लक्ष्मण धरती पर निश्चल पड़े हैं और उनके चारों तरफ भीड़ लगी है। सीता समझ गईं कि वे अब नहीं रहे। वह विलाप करने लगीं।

उनका करुण क्रंदन सुनकर त्रिजटा का हृदय भर आया। उसे अत्यन्त दुःख हुआ। वह सीता को सांत्वना देते हुए बोली -
‘‘हे वैदेही, इस समय आप जो दृश्य देख रही हैं, वह सत्य नहीं है। यह दशानन का छलावामात्र है। उसने इस पुष्पक विमान में एक ऐसा यंत्र लगा रखा है जिसके द्वारा काफी दूर के दृश्य समीप और सजीव दिख पड़ते हैं और इस यंत्र का मालिक जो चाहता है सिर्फ वही दिखाता है, दर्शक को किंचितमात्र भी यह आभास नहीं हो पाता कि वह असत्य दृश्य देख रहा है। अतः हे जनकनन्दिनी, आप इस समय जो कुछ भी देख रही हैं वही रावण आपको दिखाना चाहता है ताकि आप उसके वशीभूत हो जाएँ। इसलिए, आप दुःखी न हों, श्रीराम और लक्ष्मण दोनों जीवित हैं।’’
सीता यह वचन सुनकर चकित हो त्रिजटा का मुख निहारने लगीं। उनका विलाप बंद हो गया। बोलीं - "ऐसा! तब तो बहुत ही खतरनाक यंत्र है यह.........!!"

‘‘हाँ देवि’’ - त्रिजटा बोली - "और कलियुग में यही यंत्र दूरदर्शन के नाम से प्रसिद्ध होगा।"
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(14 दिसम्बर 1986)
pic courtsey : google (edited)

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